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Tuesday, September 3, 2019

शून्य में शून्य और विडीओ ब्लॉग पंच 5





शून्य भी बड़ा कमाल का है , एक तरफ से देखो तो शून्य है मगर सबकुछ शून्य में समाया हुवा है और वैसे भी कहा जाता है कि अंत ही आरंभ है , इस बात को समझना आसान नही है और जो समझ जाता है उसे संसार मे किसी बात का डर नही रहता है और संसार की हर मोह माया से परे हो जाता है । कुल मिलाकर देखा जाए तो शून्य एक रहस्य है जिसे सुलजाना जरूरी है हम सब शून्य के अंदर ही है और जो शून्य की सीमा बिना सोचे समझे लाँघता है वो फिर से शून्य बनकर जन्म लेता है याने शून्य बन जाता है ...... आई बात कुछ समझ मे या सब उप्पर से गया ? ....

अनुराधा चौहान जी की शून्य कलम शून्य के परिध से कुछ कहे रही है आज , जो सीधे शब्दों में साफ साफ बता रही है कि ......

शून्य से आए हैं
शून्य में समा जाएंगे
शून्य के रहस्य को
हम फिर भी न समझ पाएंगे

" पोएट्री बाय अनुराधा " एक बेहतरीन ब्लॉग है मगर उस ब्लॉग की ये रचना ईश्वर की खूबसूरत रचना को याने इंसान को बहुत कुछ समझाती है कि मत कर इतना अभिमान , मत कर ये मेरा ये मेरा क्यों कि तू खुद एक शून्य है और तुझे उसी शून्य में समाना है ,.... जरूर पढियेगा इस पोस्ट को दोस्तो ।

 अनुराधा जी कलम यहाँ है और अनुराधा जी के लिए आपको एक कमेंट enoxo multimedia के यूट्यूब चैनल पर भी देना क्यों कि कुछ रचना दिल की गहराइयों से लिखी गई होती है और हाँ यूट्यूब चैनल को subscribe करके bell आइकॉन दबाना भूलियेगा नही



 शून्य के मायाजाल में हम सब फंसे हुवे है और इतनी गहराई में फसे है कि हम कभी कभी अपनो को भी भूल जाते है , उन लोगो को भी भूल जाते है  जिन्होंने हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ दिया होता है और भूलते भी ऐसे है की उनकी याद तक नही आती मानो शून्य में समा जाती है उसकी याद , जी हाँ , शून्य .... शून्य में अपनों को डालकर शुकुन की जिंदगी जीते है हम और खुद भी शून्य की तरफ प्रस्थान करते है तो कभी उस भुलानेवाले इंसान से पूछने का मन करता है कि ....... 

तू मुझे कैसे भूल जाता है ,
भूलकर कैसे सकून पाता है !

याद आती नहीं तुझे मेरी
फ़िक्र सताती नहीं तुझे मेरी
हमने बातों में इक सदी गुज़ारी थी
 वो सदी तू कैसे भूल जाता है !

तू मुझे  कैसे भूल जाता है !

जी हाँ , वेणु जोया जी की कलम ने शून्य के मायाजाल में फंसे इंसान को कुछ पूछा है ...की , तू मुझे कैसे भूल जाता है ? ...सच कहु तो यही शून्य का कमाल है और यही आरम्भ की वजह भी है , जरूर पढियेगा इस रचना को दोस्तो .... और कमेंट में वेणु जी ने पूछे सवाल का जवाब दीजियेगा




शून्य का मायाजाल ही ऐसा है कि होकर भी साथ नही होता है जैसे आपके पास सबकुछ है मगर फिर भी , कुछ भी नही है .... आपके पास अल्फाज है , आपके पास ख्वाब है , आपके पास ख्वाहिश है ,जुबां है मगर जैसे ही शून्य के परिध को आप टच करते है वैसे आप शून्य बन जाते है और शून्य के रास्ते पर चले जाते है ..... बात अभी भी नही समझे क्या ? तो भाई चलो ज्योति सिंह की कलम से कैद कुछ अल्फाजो को समझते है .....

होकर भी साथ नहीं

ख्वाब  वही 

ख्वाहिश  वही

अल्फाज  वही 

ज़ुबां  वही  ,

फिर  रास्ते  कैसे 

जुदा  है  सफ़र  के  ,

ज्योति सिंह की इस रचना ने चंद शब्दो मे बहुत गहराई भरी बात कर दी है आप जरूर पढ़ें इस रचना को और ज्योति दीदी की इस रचना पर कमेंट करना और उनके लिए यूट्यूब पर भी कमेंट करना भूलियेगा नही




शून्य में समाए इंसान की ख्वाइश बहुत रहती है मगर इंसान हरी पत्तियों को भी पतझड़ बना देता है अपनी ख्वाइशें पूरी करने के लिए अरे भाई हरि पत्तियां का मतलब अपने हरे भरे जीवन मे ख्वाईश का ढेर लगा देता है जब हारकर थक जाता है तब ...

चंचल किरणें  शशि की
झांक रही थी पत्तियों से ,
उतर आई अब मेरे आंगन ,
जी करता इनसे अंजलि भर लूं
या  फिर थाली भर-भर रख लूं ,

जी हाँ , कुसुम कोठारी की कलम ने इंसान की उस फितरत की बात की है जो शून्य में समाई हुई है मगर फिर भी वो मजबूत है ..... आप पढिये तो सही फिर आप भी कहेंगे कि वाह ! चाँद कटोरा , .... भाई वहाँ कमेंट करके ये जरूर बताना की शून्य में समाई हुई इंसानी फितरत कितनी मजबूत है और चांद कटोरा के लिए यूट्यूब चैनल पर भी एक कमेंट जरूर करियेगा ...


शून्य भी बड़ा कमाल का है कभी खलबली मची हुई थी .... कभी वैभव अपार था और ताकत इतनी थी कि देश को 70 साल से लूट रही सरकार को भी घर का रास्ता दिखाया था , अरे ! भाई मैं 2014 के के पहले की बात कर रहा हु ब्लॉग जगत की मगर आज ना जाने उसका वो वैभव कहाँ गया ? और कहाँ खो गया वो अफाट शब्दो का खजाना .... ना जाने क्यों ? कई बेहतरीन लेखको की कलम शून्य हो गई ... ना जाने क्यों ?

शून्य , क्या इसीको कहते है अंत ? अगर इसीको अंत कहते है तो दूसरी तरफ अंत को ही आरम्भ भी कहते है .... चलो दोस्तो एकबार फिर से प्राप्त करे वो वैभव जिसमे आप जैसे लेखको की तेज कलम के माध्यम से कैद होते अल्फाज हो

चलो ब्लॉग जगत की हालत पर हो जाये एक बात ..मेरे प्रिय बंधु और मार्गदर्शक श्री अजय झा जी की कलम आज फिर से कुछ बात कर रही है जरूर पढियेगा दोस्तो


* विडीओ ब्लॉग पंच के एपिसोड









एकबार अवश्य देखे और चुने अपनी पसंदीदा ब्लॉग

* आप मुझे यहाँ मिलिए 






धन्यवाद ,

Monday, August 12, 2019

भावनाओं के प्रसव की उपज है कविता ... विडियो ब्लॉग पंच 5 लिंक



भावनाओं के प्रसव की उपज है कविता ..... वाह ! क्या बात है ? जबदस्त कविता है ये , इस कविता को मानो सुधा देवरानी ने दिल की गहराई में कलम डुबोकर लिखी है

इस कविता में ओर भी एक पंक्ति है जो बयाँ करती है एक कवि की भावना और वो... इस प्रकार है...

फिर कागज पे कलम से बुन लूँ
बन जाये कोई कविता
जो मन को लगे सुहानी

अरे ! आप तो कविता में खो गए , मैं थोड़े ही यहाँ पूरी कविता प्रस्तुत करनेवाला हु .....अगर आपको सुधा देवरानी द्वारा लिखी गई ये पोस्ट पढ़नी है तो आपको यहाँ जाना होगा , तो चलो लिंक पर क्लिक करो दोस्तो और हाँ , सुधा देवरानी जी की कलम के बारे में उनके ब्लॉग पर जा कर दो शब्द कमेंट के रूप में कहना जरूर |


तो चलिए अब बढ़ते है चन्द पंक्तियाँ की ओर , कौन कहता है कि कविताएं बस यूँ ही .... बन जाती है भाई ? अरे कविता लिखनेवालों को पूछो की दिल की गहराई के समंदर में डुबकी लगाकर स्मृति पटल पर उभरे शब्दो को कागज पर कैद करना कितना आनंद और दर्द से भरा होता है ?

खैर बात निकली ही है चन्द पंक्तियाँ की , तो करते है चन्द पंक्तियाँ में उभरे दर्द की और उस दर्द में छुपे सुगंध की , सुबोध दीक्षित की कलम आज कहती है चन्द पंक्तियाँ ..... जो इस प्रकार है

माना कि ... पता नहीं मुझे
पता तुम्हारा,
पर सुगन्धों को भला
कब चाहिए साँसों का पता
बोलो ना जरा ...

इस पोस्ट में लिखी गई इस बात की गहराई में कभी जाना दोस्त , आपको कलम और महोब्बत की ताकत का अंदाजा हो जाएगा और उनके ब्लॉग पर जा कर दो शब्द कमेंट के रूप में कहना जरूर चन्द पंक्तियों में

सुबोध सिन्हा जीकी कलम को यहाँ पढ़िए

नोट : सुबोध जी की हम माफी चाहते है कि हमसे अनजाने में उनका नाम सुबोध सिन्हा की जगह सुबोध दीक्षित हो गया था । 



चलो अब आगे बढ़ाते है कारवाँ ब्लॉग पंच 3 का और बात करते है जमीन , घर , पेड़ , और पानी की , ओह ! बात नही भाई , गुफ्तगू करते है कहो । पम्मी सिंह की कलम जब भी किसी मुद्दे पर गुफ्तगू करती है ना , तो दिल बाग बाग हो जाता है मगर गालो पर सबक के चांटे की उंगलियां साफ दिखाई देती है । ऐसा ही एक सबक उनकी कलम ने हम सबको दिया है .... जल संरक्षण के नाम से

उनकी कलम कहती है कि .......

एहतियात जरूरी है,घर को बचाने के लिए।
पेड़-पौधे ज़रूरी है,ज़मीन को संवारने के लिए।।

कर दिया ख़ाली ,जो ताल था कभी भरा ।
 मौन धरा पूछ रही, किसने ये सुख हरा।।

पड़ा ना सबक का चांटा ? अरे भाई हमने तो पहले ही कहे दिया था कि सबक का चांटा पड़ता है पम्मी सिंह की कलम से , तो आगे से ये बात याद रखना और पानी याने जल संरक्षण जरूर करना वर्ना अब की बार मौन धरा नही बल्कि पम्मी सिंह की कलम बोलेगी की ..... किसने ये सुख हरा ? तो अब उनके ब्लॉग पर जा कर, दो शब्द कमेंट के रूप में कहना जरूर ।


वीडियो ब्लॉग पंच 3 के कारवाँ को आगे बढ़ाते है और अब आपको लेकर चलते है जल से सीधा चाँद पर , तो क्या आप तैयार है ? अरे ! भाई , जाना नही है मगर यहीं से ही चाँद को कुछ सुनाना है और मुझे यकीन है की रेणु जी की कलम की आवाज चाँद को भी सुनाई देगी ।


 सुनो चाँद !..

अब  नहीं हो! दुनिया के लिए,
 तुम तनिक भी अंजाने, चाँद!
 सब जान गए राज तुम्हारा
 तुम इतने भी नहीं सुहाने, चाँद!

चाँद से भला कौन प्यार नही करता ? क्यो की वो तो पूरी दुनियाँ के मामा है और मामा शब्द में तो दो माँ आती है ,तो उनके ब्लॉग पर जा कर दो शब्द कमेंट के रूप में कहना जरूर तो जाइये और कमेंट दीजिये इंतजार किस बात का भाई ?


चलो अब बहुत हुवा पहले एक कवि का हृदय देखा फिर एक मोहब्बत से भरी कलम की सुगंध को देखा उसके बाद जल संरक्षण देखकर चाँद पर भी जा आये तो भाई अब चाँद से वापस नीचे आ जाओ क्यों कि जीवन मे थोड़ा परिवर्तन भी जरूरी है । तो चलो चलते है परिवर्तन की ओर ....... क्या बात है चलो चलते है कहने पर आप अकेले चल दिए ? , रुको भाई हम भी तो आ रहे है ओमकार जी के गाँव मे , हमे भी देखना है कि किस परिवर्तन की बात वो करते है ।


मेरे गाँव में अब
पढ़े-लिखे रहते हैं,
हिंदी समझते हैं,
पर अंग्रेज़ी कहते हैं.

सच तो कहा है ओमकार जी की कलम ने क्यों की इतनी मीठी हमारी राष्ट्रभाषा है मगर आज भी अंग्रेजी बोलकर लोग रुबाब झाड़ते है , अंग्रेजी बोलने से कुछ नही होता बंधु , जो होता है वो बुद्धि से होता है और अपनेपन से होता है ..... भला ये अंग्रेजी में कहाँ है अपनापन ?



विडीओ ब्लॉग पंच 3 के एपिसोड में इन लिंको की प्रस्तुति करके चर्चा की गई है कृपया एक बार जरूर देखें और कमेंट के रूप में वहां अपना आशीर्वाद दर्ज करे





नोट : अगर आप भी अपने ब्लॉग को विडीओ ब्लॉग पंच में शामिल करना चाहते है तो आपके ब्लॉग की लिंक हमे हमारे ईमेल आईडी पर भेजे , हमारा ईमेल आईडी हमने वीडियो ब्लॉग पंच 3 के विडीओ में दिया है ।

आप मुझे यहाँ मिलिए :






धन्यवाद ,


जल्द ही मिलेंगे नए ब्लॉग पंच के नए एपिसोड के साथ

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